Equity Mutual Fund
शेयर बाजार में निवेश करके पैसा बनाने की इच्छा बहुत से लोगों की होती है, लेकिन सीधे शेयर खरीदना हर निवेशक के लिए आसान नहीं होता। कंपनियों का चुनाव, बाजार पर नजर और पोर्टफोलियो को संभालना समय और जानकारी दोनों मांगता है। ऐसे में इक्विटी म्युचुअल फंड एक ऐसा विकल्प है, जिसके जरिए निवेशक फंड मैनेजर की मदद से कई कंपनियों के शेयरों में पैसा लगा सकते हैं।
इक्विटी म्युचुअल फंड में कई निवेशकों से जुटाई गई रकम को अलग अलग कंपनियों के शेयरों में लगाया जाता है। इसका मतलब है कि निवेश किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं रहता। शेयरों की कीमत बढ़ने पर फंड का नेट एसेट वैल्यू यानी NAV बढ़ सकता है। वहीं, बाजार में गिरावट आने पर NAV और निवेश की वैल्यू भी कम हो सकती है।
इसलिए इक्विटी फंड में निवेश करते समय सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किसी फंड ने पिछले साल कितना रिटर्न दिया। फंड की निवेश रणनीति, जोखिम और लंबी अवधि के प्रदर्शन को भी समझना जरूरी है।
इक्विटी फंड चुनने से पहले क्या देखें?
बाजार में इक्विटी म्युचुअल फंड की कई योजनाएं उपलब्ध हैं। इनका निवेश अलग अलग कंपनियों, सेक्टर और रणनीतियों के आधार पर होता है। ऐसे में किसी फंड को चुनने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच करनी चाहिए।
मोतीलाल ओसवाल एएमसी में एक्टिव फंड्स के हेड प्रशांत जोशी कहते हैं, “अच्छा फंड वह नहीं है जो एक साल में सबसे ज्यादा कमाए, बल्कि वह है जो हर तरह के बाजार में लगातार बेहतर और संतुलित रिटर्न दे।”
इन 5 बातों पर जरूर दें ध्यान
1. एक साल के रिटर्न से फैसला न करें
किसी फंड का प्रदर्शन सिर्फ एक साल देखकर उसकी पूरी तस्वीर समझना मुश्किल है। अलग अलग बाजार स्थितियों में फंड ने कैसा प्रदर्शन किया है, इसे देखना ज्यादा जरूरी है। खासकर बाजार में गिरावट के दौरान फंड कितना संभल पाया, इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
2. फंड मैनेजर और निवेश टीम को समझें
फंड में आपका पैसा किसकी देखरेख में निवेश हो रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है। फंड मैनेजर का अनुभव, निवेश की शैली और रिसर्च टीम की भूमिका को समझने से फंड की रणनीति के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकती है।
3. पोर्टफोलियो में कौन सी कंपनियां हैं, यह देखें
निवेश करने से पहले यह जानना जरूरी है कि फंड का पैसा किन कंपनियों और सेक्टर में लगाया गया है। इससे आपको यह समझने में मदद मिलती है कि फंड किस तरह की कंपनियों पर दांव लगा रहा है और आपके निवेश का जोखिम किन क्षेत्रों से जुड़ा है।
4. गिरते बाजार में फंड का व्यवहार देखें
इक्विटी निवेश में बाजार का ऊपर नीचे होना सामान्य है। इसलिए सिर्फ तेजी के दौरान मिले रिटर्न को देखना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखें कि बाजार में बड़ी गिरावट के समय फंड का प्रदर्शन कैसा रहा। इससे फंड के जोखिम को समझने में मदद मिल सकती है।
5. खर्च और अपने लक्ष्य का रखें ध्यान
फंड चुनते समय उसके खर्च को भी समझना जरूरी है। इसके साथ यह देखें कि फंड आपकी निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य के अनुकूल है या नहीं। हर निवेशक के लिए एक ही तरह का इक्विटी फंड सही नहीं हो सकता।
सिर्फ ज्यादा रिटर्न वाला फंड ही अच्छा है?
जरूरी नहीं। किसी फंड का एक अवधि में बहुत ज्यादा रिटर्न देना यह साबित नहीं करता कि वह आगे भी वैसा ही प्रदर्शन करेगा। फंड का मूल्यांकन करते समय अलग अलग समय में उसका प्रदर्शन, जोखिम और निवेश रणनीति को एक साथ देखना जरूरी है।
इक्विटी फंड में निवेश का उद्देश्य आमतौर पर लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करना होता है। इसलिए थोड़े समय के उतार चढ़ाव के बजाय निवेश की अवधि और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।
निवेशकों को क्या समझना चाहिए?
इक्विटी म्युचुअल फंड में बाजार से जुड़ा जोखिम रहता है। इसलिए इसमें निवेश को जल्दी पैसा बनाने के तरीके के तौर पर नहीं देखना चाहिए। सही फंड चुनने के लिए उसके पिछले प्रदर्शन के साथ पोर्टफोलियो, फंड मैनेजर, जोखिम और खर्च को समझना जरूरी है।
अगर निवेशक अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के मुताबिक फंड चुनते हैं और लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं, तो इक्विटी म्युचुअल फंड उनके वित्तीय लक्ष्यों के लिए एक विकल्प हो सकता है।
