Debt Mutual Funds

Debt Mutual Funds

स्ट्रैप: डेट म्युचुअल फंड्स को उनकी अवधि और जोखिम के आधार पर अलग अलग कैटेगरी में बांटा जाता है। जानिए लिक्विड, अल्ट्रा शॉर्ट, शॉर्ट ड्यूरेशन और गिल्ट फंड में क्या अंतर है।

अगर आप म्युचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन शेयर बाजार के उतार चढ़ाव से बचना चाहते हैं, तो डेट म्युचुअल फंड आपके लिए एक विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, डेट फंड की कई कैटेगरी होने की वजह से निवेशकों के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि लिक्विड, अल्ट्रा शॉर्ट, शॉर्ट ड्यूरेशन और गिल्ट फंड में क्या अंतर है।

आसान भाषा में समझें तो डेट म्युचुअल फंड निवेशकों से जुटाए गए पैसे को बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों और दूसरे फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में लगाते हैं। अलग अलग डेट फंड की निवेश अवधि और पोर्टफोलियो अलग होता है। इसी वजह से इनके जोखिम और रिटर्न में भी अंतर होता है।

ड्यूरेशन और जोखिम से तय होती है फंड की कैटेगरी

डेट फंड्स को मुख्य रूप से इस आधार पर अलग अलग कैटेगरी में रखा जाता है कि वे कितनी अवधि वाली सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं और उनका पोर्टफोलियो किस तरह की प्रतिभूतियों से बना है।

डेट म्युचुअल फंड्स को इस आधार पर अलग अलग कैटेगरी में बांटा जाता है कि वे कितने समय के बॉन्ड में निवेश करते हैं और किस तरह की सिक्योरिटी में पैसा लगाते हैं। इसी से तय होता है कि फंड में कितना जोखिम होगा, कितना उतार चढ़ाव आएगा और ब्याज दर बदलने पर उस पर कितना असर पड़ेगा

1. लिक्विड फंड: थोड़े समय के लिए पैसा रखने का विकल्प

लिक्विड फंड ओपन एंडेड डेट म्युचुअल फंड होते हैं। ये केवल डेट और मनी मार्केट सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, जिनकी मैच्योरिटी अवधि अधिकतम 91 दिन तक होती है। कम अवधि वाली इन सिक्योरिटीज की वजह से ब्याज दर का जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है और निवेशकों को पैसा निकालने में आसानी होती है।

आसान भाषा में कहें तो लिक्विड फंड का इस्तेमाल कुछ दिनों या कुछ महीनों के लिए खाली पड़े पैसे को निवेश करने के लिए किया जा सकता है।

सामान्य निवेश:

ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट और शॉर्ट टर्म कॉरपोरेट डेट

मुख्य विशेषताएं:

ब्याज दर का जोखिम बहुत कम होता है। इनमें लिक्विडिटी अधिक रहती है और कुछ दिनों से लेकर कुछ महीनों तक पैसे रखने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

जोखिम स्तर: बहुत कम
निवेश अवधि: कुछ दिन से 3 महीने
उदाहरण: अस्थायी रूप से खाली पड़े पैसे को कुछ समय के लिए निवेश करने के लिए लिक्विड फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. अल्ट्रा शॉर्ट फंड: लिक्विड फंड से थोड़ी लंबी अवधि

अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड भी ओपन एंडेड डेट म्युचुअल फंड होते हैं। ये डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। इनके पोर्टफोलियो की मैकॉले अवधि आमतौर पर 3 महीने से 6 महीने के बीच होती है।

लिक्विड फंड की तुलना में इनमें निवेश की अवधि थोड़ी ज्यादा होती है। इसलिए ब्याज दर और क्रेडिट से जुड़े जोखिम में भी अंतर हो सकता है।

सामान्य निवेश:

शॉर्ट टर्म कॉरपोरेट बॉन्ड, कमर्शियल पेपर और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट

मुख्य विशेषताएं:

लिक्विड फंड की तुलना में ज्यादा अवधि वाली सिक्योरिटीज में निवेश होता है। इनमें उतार चढ़ाव आमतौर पर कम रहता है, हालांकि फंड की रणनीति के आधार पर क्रेडिट जोखिम हो सकता है।

जोखिम स्तर: कम
निवेश अवधि: 3 से 6 महीने
उदाहरण: ऐसे निवेशक जो बहुत कम अवधि के बजाय कुछ महीनों के लिए पैसा निवेश करना चाहते हैं, वे इस कैटेगरी को समझ सकते हैं।

3. शॉर्ट ड्यूरेशन फंड: 1 से 3 साल के लिए

शॉर्ट ड्यूरेशन फंड ओपन एंडेड डेट म्युचुअल फंड होते हैं। ये डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। इनके पोर्टफोलियो की मैकॉले अवधि आमतौर पर 1 साल से 3 साल के बीच होती है।

इस कैटेगरी में लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट फंड की तुलना में ज्यादा अवधि वाली सिक्योरिटीज शामिल होती हैं। इसलिए ब्याज दरों में बदलाव का असर भी ज्यादा हो सकता है।

सामान्य निवेश:

कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी सिक्योरिटीज और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स

मुख्य विशेषताएं:

ब्याज दरों में बदलाव के प्रति मध्यम संवेदनशीलता होती है। अल्ट्रा शॉर्ट फंड की तुलना में इनमें ज्यादा अवधि वाली सिक्योरिटीज होती हैं और निवेशकों के लिए 1 से 3 साल की अवधि पर विचार किया जा सकता है।

जोखिम स्तर: कम से मध्यम
निवेश अवधि: 1 से 3 साल
उदाहरण: ऐसे निवेशक जो कुछ साल की अवधि के लिए डेट फंड में पैसा रखना चाहते हैं, वे शॉर्ट ड्यूरेशन फंड को समझ सकते हैं।

4. गिल्ट फंड: सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश

गिल्ट फंड ओपन एंडेड डेट म्युचुअल फंड होते हैं। ये मुख्य रूप से सरकार की ओर से जारी की गई प्रतिभूतियों, जैसे सरकारी बॉन्ड यानी जी सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं।

इनमें सरकारी प्रतिभूतियां होने की वजह से क्रेडिट डिफॉल्ट का जोखिम बहुत कम माना जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि गिल्ट फंड में उतार चढ़ाव नहीं होता। इन फंड्स पर ब्याज दरों में बदलाव का असर पड़ सकता है। खासकर लंबी अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों में ब्याज दर का जोखिम ज्यादा हो सकता है।

गिल्ट फंड को अपने कुल एसेट का कम से कम 80 फीसदी हिस्सा अलग अलग मैच्योरिटी अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना होता है।

मुख्य विशेषताएं:

क्रेडिट जोखिम बहुत कम होता है। हालांकि, लंबी अवधि के बॉन्ड होने की वजह से ब्याज दर का जोखिम ज्यादा हो सकता है। ब्याज दरों में बदलाव होने पर फंड के एनएवी में भी उतार चढ़ाव आ सकता है।

जोखिम स्तर: मध्यम से अधिक
निवेश अवधि: 5 साल या उससे अधिक

निवेशकों के लिए आसान गाइड

डेट म्युचुअल फंड को एक ही तरह का निवेश विकल्प मानना सही नहीं है। अलग अलग कैटेगरी की अवधि, पोर्टफोलियो और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशीलता अलग होती है। इसलिए फंड चुनने से पहले यह समझना जरूरी है कि पैसा कितने समय के लिए निवेश करना है और आप कितना जोखिम उठा सकते हैं।

फंड कैटेगरीसामान्य अवधिजोखिम स्तरकिस तरह के निवेश के लिए
लिक्विड फंडकुछ दिन से 3 महीनेबहुत कमथोड़े समय के लिए पैसा रखने के लिए
अल्ट्रा शॉर्ट फंड3 से 6 महीनेकमकुछ महीनों की अवधि के लिए
शॉर्ट ड्यूरेशन फंड1 से 3 सालकम से मध्यम1 से 3 साल की अवधि के लिए
गिल्ट फंड5 साल या उससे अधिकमध्यम से अधिकलंबी अवधि और ब्याज दर के जोखिम को समझने वाले निवेशकों के लिए

आसान शब्दों में कहें तो कम अवधि के लिए लिक्विड या अल्ट्रा शॉर्ट फंड की कैटेगरी पर विचार किया जा सकता है। 1 से 3 साल की अवधि के लिए शॉर्ट ड्यूरेशन फंड को देखा जा सकता है। वहीं, गिल्ट फंड में निवेश करते समय ब्याज दरों में बदलाव से होने वाले उतार चढ़ाव को समझना जरूरी है।

डेट फंड चुनते समय केवल रिटर्न देखना पर्याप्त नहीं है। निवेश की अवधि, फंड की पोर्टफोलियो संरचना, ब्याज दर का जोखिम और आपकी अपनी जोखिम क्षमता को भी ध्यान में रखना चाहिए।

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